jallianwala bagh | जलियांवाला बाग हत्याकांड

जलियांवाला बाग हत्याकांड –

जलियांवाला बाग (jallianwala bagh) हत्याकांड ( 13 अप्रैल 1919) रौलेट अधिनियम के विरुद्ध गांधी जी के नेतृत्व में शुरू हुए रौलेट सत्याग्रह की ही चरम परिणति जलियाँवाला बाग हत्याकांड था। गांधी जी ने सभी भारतियों को रॉलेट एक्ट का विरोध करने का अनुरोध किया। सरकार ने रॉलेट एक्ट के विरोधियों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी। जिससे जनता का आक्रोश पूरे देश में फैल गया और लोग सड़कों पर उतर आए। पंजाब के अमृतसर के नजदीक जलियावाला बाग में, लोकप्रिय नेता डॉ० सैफ्फुद्दीन किचलू और डॉ० सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध प्रदर्शन हेतु 13 अप्रैल 1919 को (वैशाखी का दिन) एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था। सभास्थल चारों ओर से ऊँची-ऊँची दीवारों से घिरा था, दो-चार फीट के दरवाजों के अलावा केवल एक 7 फीट चौड़ा दरवाजा था। सरकार को संदेह हुआ कि कहीं 1857 की क्रांति न दोहराई जाए । सभा स्थल पर उपस्थित अंग्रेज जनरल रैगिनैल्ड एडबर्ड हैरी ओ डायर ने बिना कोई सूचना या चेतावनी के भीड़ पर गोली चलवा दी जिस कारण बगदड़ मच गई , लोग जाँन बचने के  के लिए बाग मे स्थित कुंवे मे कूद गए। जिसमें करीब 1000 निर्दोष लोग  मारे गए। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 10 मिनट तक हुई गोलाबारी में करीब 379 व्यक्ति मारे गये और 1200 घायल हुए।

रॉलेट एक्ट-

क्रांतिकारियों की गतिविधियों को कुचलने हेतु ब्रिटिश सरकार ने 1917 ई0 में सिडनी रोलेट की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की। 6 से 17 मार्च 1919 को इसकी समीक्षा हेतु दिल्ली के इम्पीरियल लेजिसलेटिव एसेम्बली में बहस चली भारतीयों के विरोध के बावजूद रॉलेट एक्ट को पारित कर दिया गया।

क्या था  – इस एक्ट के में संदेह के तहत किसी भी भारतीय को 2 साल तक गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाता था। मोती लाल नेहरू ने उसे “बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील का कानून” कहा। भारतीय जनता ने इसे काला कानून कहा।

 

  • जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने ‘नाइट हुड’ और ‘सर’ की उपाधि वापस कर दी, वायसराय की कार्यकारिणी के सदस्य शंकर नायर ने भी त्यागपत्र दे दिया।

    jallianwala bagh | जलियांवाला बाग हत्याकांड
    जलियावाला बाग में दीवारों पर गोलियों के निशान

जाँच –

सरकार ने इस हत्याकांड की जांच के लिए लार्ड हण्टर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया। जिसके सदस्यों में जस्टिस टेस्किन, मि० राइस, सर जार्ज बरो, सर टॉमस स्मिथ, सर चमनलाल सीतलवाड़, साहबजादा सुल्तान अहमद, जगत नारायण आदि शामिल थे। हण्टर आयोग ने जनरल डायर को बचाने के लिए मामले की लीपापोती की थी। सजा के रूप में डायर को केवल नौकरी से बर्खास्त किया गया, ब्रिटेन के हाऊस ऑफ लार्डस में डायर की प्रशंसा में भाषण दिये गये और उसे ‘ब्रिटिश साम्राज्य का शेर’ कहा गया तथा सम्मान में ‘Sword of Honour’ और 2600 पौंड की धनराशि दी गई।

पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ० डायर की लंदन में मार्च 1940 में क्रांतिकारी उधम सिंह द्वारा हत्या कर दी गई।

कांग्रेस ने जलियाँवाला बाग हत्याकांड की जांच हेतु मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय तहकीकात समिति की नियुक्ति की। समिति के सदस्य थे-मोतीलाल नेहरू, महात्मा गांधी, सी० आर० दास, अब्बास तैय्यबजी, फजलुल हक, के॰ संथानम और जयकर आदि । जलियाँवाला नरसंहार पर कांग्रेस जांच समिति की रिपोर्ट के प्रारूप को लिखने का कार्य महात्मा गांधी को सौंपा गया था। जलियाँवाला बाग हत्याकांड को दीनबंधु एण्ड्रज ने जान बूझकर की गई क्रूर हत्या तथा ब्रिटिश हाउस ऑफ कामंस के सदस्य विंस्टन चर्चिल ने कहा कि “ऐसी बर्बरता की मिसाल संसार में कहीं भी मिलना कठिन है।”

jallianwala bagh | जलियांवाला बाग हत्याकांड

• जलियाँवाला नरसंहार को मांटेग्यू ने ‘निवारक हत्या’ की संज्ञा दी।

• वैलेंटाइन शिरोल ने 13 अप्रैल के दिन को ब्रिटिश भारत के इतिहास का काला दिन(Black Day) कहा ।

जलियाँवाला बाग हत्याकांड के समय ही पंजाब में चमनदीप के नेतृत्व में एक ‘डंडा ‘फौज’ अस्तित्व में आयी, जो लाठियों और चिड़ियामार बंदूकों से लैस होकर सड़कों पर गश्त लगाते और पोस्टर चिपकाते थे ।

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FAQ

Ques – जलियांवाला बाग हत्याकांड में क्या हुआ था?

13 अप्रैल 1919 को (वैशाखी का दिन) एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था। सभास्थल चारों ओर से ऊँची-ऊँची दीवारों से घिरा था, दो-चार फीट के दरवाजों के अलावा केवल एक 7 फीट चौड़ा दरवाजा था। सरकार को संदेह हुआ कि कहीं 1857 की क्रांति न दोहराई जाए । सभा स्थल पर उपस्थित अंग्रेज जनरल रैगिनैल्ड एडबर्ड हैरी ओ डायर ने बिना कोई सूचना या चेतावनी के भीड़ पर गोली चलवा दी जिस कारण बगदड़ मच गई , लोग जाँन बचने के  के लिए बाग मे स्थित कुंवे मे कूद गए। जिसमें करीब 1000 निर्दोष लोग  मारे गए।

Ques – जलियांवाला बाग हत्याकांड कब और क्यों हुआ था?

13 अप्रैल 1919 को (वैशाखी का दिन) एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था। सभा स्थल पर उपस्थित अंग्रेज जनरल रैगिनैल्ड एडबर्ड हैरी ओ डायर ने बिना कोई सूचना या चेतावनी के भीड़ पर गोली चलवा दी जिस कारण करीब 1000 निर्दोष लोग  मारे गए। रॉलेट एक्ट के कारण पंजाब के अमृतसर के नजदीक जलियावाला बाग में, लोकप्रिय नेता डॉ० सैफ्फुद्दीन किचलू और डॉ० सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध प्रदर्शन हेतु 13 अप्रैल 1919 को (वैशाखी का दिन) एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था।

Ques – जलियांवाला बाग हत्याकांड में गोली चलाने का आदेश कौन दिया था?

13 अप्रैल 1919 को (वैशाखी का दिन) एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था। सभा स्थल पर उपस्थित अंग्रेज जनरल रैगिनैल्ड एडबर्ड हैरी ओ डायर ने बिना कोई सूचना या चेतावनी के भीड़ पर गोली चलवा दी जिस कारण करीब 1000 निर्दोष लोग  मारे गए।

Ques – बाग हत्याकांड में कितने लोग मारे गए थे?

बाग हत्याकांड में करीब 1000 निर्दोष लोग  मारे गए। लेकिन सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 10 मिनट तक हुई गोलाबारी में करीब 379 व्यक्ति मारे गये और 1200 घायल हुए।

Ques – जालियांवाला बाग़ कहां स्थित है ?

पंजाब के अमृतसर के नजदीक जलियावाला बाग स्थित है।

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